बच्चों के लिए कितना स्क्रीन टाइम ठीक है? उम्र के हिसाब से (WHO और IAP)
By Akshay · 1 Nov 2026 · 6 min read
छोटा जवाब: भारत के बाल रोग विशेषज्ञों की संस्था IAP (2022) के अनुसार 2 साल से छोटे बच्चों को स्क्रीन बिल्कुल नहीं दिखानी चाहिए, 2 से 5 साल के बच्चों के लिए दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 1 घंटा, और वह भी बड़ों के साथ, और 5 से 10 साल के बच्चों के लिए दिन में 2 घंटे से कम। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO, 2019) की सलाह भी लगभग यही है।
नीचे उम्र के हिसाब से पूरी जानकारी है, साथ में यह भी कि स्क्रीन धीरे-धीरे कैसे कम करें और उसकी जगह बच्चे को क्या दें।
यह लेख माता-पिता के लिए आम जानकारी है, डॉक्टरी सलाह नहीं। अपने बच्चे की सेहत या विकास को लेकर कोई भी चिंता हो, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) से बात करें।
उम्र के हिसाब से कितना स्क्रीन टाइम
- 1 साल से कम: स्क्रीन नहीं (WHO और IAP दोनों)।
- 1 से 2 साल: IAP के अनुसार स्क्रीन नहीं। WHO कहता है कि 1 साल के बच्चे को बैठाकर स्क्रीन न दिखाएँ, और 2 साल के बच्चे के लिए दिन में 1 घंटे से ज़्यादा नहीं, जितना कम उतना अच्छा।
- 2 से 5 साल: दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 1 घंटा, बड़ों की निगरानी में (IAP)। WHO भी 3–4 साल के लिए यही कहता है: 1 घंटे तक, जितना कम उतना अच्छा।
- 5 से 10 साल: दिन में 2 घंटे से कम (IAP)।
दोनों संस्थाएँ एक बात पर ज़ोर देती हैं: रिश्तेदारों से कभी-कभार वीडियो कॉल इसमें अलग है, क्योंकि वह असली बातचीत है।
ये आँकड़े सख़्त नियम नहीं, दिशा हैं
हर बच्चा और हर घर अलग होता है। अगर आपका 3 साल का बच्चा किसी दिन 1 घंटे से थोड़ा ज़्यादा देख ले, तो घबराने की ज़रूरत नहीं। असली सवाल यह है कि स्क्रीन किस चीज़ की जगह ले रही है।
IAP साफ़ कहता है कि स्क्रीन को नींद, बाहर के खेल, परिवार और दोस्तों के साथ समय, पढ़ाई और नई चीज़ें सीखने की जगह नहीं लेनी चाहिए।
3–4 साल के बच्चे का दिन, WHO के अनुसार
- नींद: 10 से 13 घंटे (दोपहर की झपकी मिलाकर)
- चलना-फिरना और खेल: कम से कम 3 घंटे, जिसमें कम से कम 1 घंटा थकाने वाला खेल
- एक जगह बिठाकर रखना (स्ट्रॉलर, कुर्सी): एक बार में 1 घंटे से ज़्यादा नहीं
- बैठे हों तो: बड़ों का कहानी सुनाना या बात करना सबसे अच्छा
इस हिसाब से खाना, नहाना और आँगनवाड़ी या स्कूल जोड़ें, तो स्क्रीन के लिए बहुत कम समय बचता है।
स्क्रीन धीरे-धीरे कैसे कम करें
एक ही दिन में मोबाइल पूरी तरह बंद कर दें तो बच्चा बहुत रोता है और हम भी दो दिन में हार मान लेते हैं। इसलिए हर हफ़्ते सिर्फ़ एक बदलाव करें:
- पहला हफ़्ता: खाते समय स्क्रीन बंद। शुरू में बच्चा कम खाएगा, चलेगा। भूख लगेगी तो खाएगा।
- दूसरा हफ़्ता: सोने से कम से कम एक घंटा पहले टीवी और मोबाइल बंद। उस समय नहाना, कहानी, गाना जैसा रोज़ का एक ही क्रम रखें।
- तीसरा हफ़्ता: स्क्रीन का रोज़ एक ही तय समय रखें, जैसे शाम 5 से 5:30। बाक़ी समय कहें: "मोबाइल अभी सो रहा है।"
- चौथा हफ़्ता: ख़ाली समय के लिए खेल पहले से तय करें, और हफ़्ते में एक "नो-स्क्रीन दिन" आज़माएँ।
घर के सभी बड़ों को, दादा-दादी समेत, एक ही नियम मानना चाहिए। एक ने मना किया और दूसरे ने मोबाइल दे दिया, तो बच्चा दूसरे के पास ही जाएगा।
मोबाइल वापस लेने पर बच्चा रोए तो क्या कहें
पहले 3–4 दिन ज़िद बढ़ सकती है। यह सामान्य है, बच्चा नया नियम परख रहा होता है। शांत और पक्के रहें:
- पहले से बता दें: "बस 5 मिनट और, फिर बंद।" अचानक मोबाइल न छीनें।
- टाइमर लगाएँ: टाइमर बजे तो "बंद" वह कहता है, आप नहीं।
- भावना मानें: "तुम्हें और देखना था, इसलिए गुस्सा आ रहा है। मैं समझती हूँ।" लेकिन नियम न बदलें।
- विकल्प दें: "अब चित्र में रंग भरें या ब्लॉक्स से घर बनाएँ?"
मोबाइल को इनाम या चुप कराने का अकेला तरीक़ा न बनाएँ, वरना बच्चा मोबाइल पाने के लिए ही रोना सीख जाता है।
स्क्रीन की जगह क्या दें: 10 आसान खेल
- तकिए-चादर का घर या तंबू, अंदर बैठकर कहानी
- डिब्बे, कटोरी, चम्मच का बैंड
- रंग भरने और अक्षर लिखने के पन्ने
- रसोई में मदद: मटर छीलना, सब्ज़ियाँ धोना, थाली लगाना
- आटे या मिट्टी से जानवर बनाना
- पत्ते, पत्थर और फूल इकट्ठा करना
- चॉक से ज़मीन पर चित्र
- "मैं एक चीज़ देख रहा हूँ, उसका रंग लाल है..." वाला खेल
- आँखें बंद करके आवाज़ पहचानना
- रोज़ रात एक कहानी
स्क्रीन देनी ही पड़े, तो कैसे
- साथ देखें और बात करें: "यह कौन-सा जानवर है? यह क्या कर रहा है?"
- धीमे और शांत कार्यक्रम चुनें, तेज़ आवाज़ और लगातार बदलते दृश्यों वाले वीडियो से बचें।
- ऑटोप्ले बंद करें: "एक कहानी, फिर बंद।"
- पैरेंटल कंट्रोल: YouTube Kids और Google Family Link से समय-सीमा तय की जा सकती है।
- स्क्रीन बड़े कमरे में रखें, ताकि बच्चा अकेले, दरवाज़ा बंद करके न देखे।
डॉक्टर से कब बात करें
अगर इनमें से कोई बात आपको लगातार दिखे, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें:
- उम्र के हिसाब से बोलना या समझना पीछे लगता है
- नींद लगातार कम है, या बच्चा रात में बार-बार जागता है
- आँखें मलना, आँखों से पानी, बहुत पास से देखना या सिरदर्द
- स्क्रीन बंद करने पर गुस्सा इतना तेज़ कि रोज़ की ज़िंदगी मुश्किल हो जाए
- खेल, लोगों या दूसरे बच्चों में रुचि बहुत कम हो गई है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2 साल के बच्चे को कितना मोबाइल दिखा सकते हैं?
IAP के अनुसार 2 साल से छोटे बच्चे को स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए, सिर्फ़ रिश्तेदारों से कभी-कभार वीडियो कॉल ठीक है। 2 साल पूरे होने के बाद दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 1 घंटा, बड़ों के साथ।
3 से 5 साल के बच्चे के लिए कितना स्क्रीन टाइम ठीक है?
दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 1 घंटा, बड़ों की निगरानी में। जितना कम, उतना अच्छा।
क्या वीडियो कॉल भी स्क्रीन टाइम में गिना जाता है?
दादा-दादी या रिश्तेदारों से कभी-कभार वीडियो कॉल को IAP छोटे बच्चों के लिए भी अपवाद मानता है, क्योंकि उसमें बच्चा असली इंसान से बात करता है।
क्या पढ़ाई वाले वीडियो ठीक हैं?
अच्छे और शांत कार्यक्रम बेहतर हैं, लेकिन वे भी उसी दिन की समय-सीमा में गिने जाते हैं। बच्चे के साथ बैठकर देखें और बात करें, तभी देखना सीखने में बदलता है।
सोने से पहले मोबाइल क्यों नहीं देना चाहिए?
कई बाल रोग विशेषज्ञ सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद रखने की सलाह देते हैं। चमकती स्क्रीन और तेज़ वीडियो के बाद बच्चों को शांत होने में समय लगता है।
आगे क्या
हफ़्ते-दर-हफ़्ते का पूरा प्लान, रोने-ज़िद पर क्या कहें, 50 घरेलू खेल और रोज़ का टाइम-टेबल हमारी छोटी किताब मोबाइल कम, खेल ज़्यादा में है, हिंदी, अंग्रेज़ी और मराठी में। और मोबाइल की जगह रोज़ 20–30 मिनट की एक्टिविटी चाहिए, तो हमारी Colour & Learn एक्टिविटी बुक देखें: हिंदी वर्णमाला, English A–Z, अंक और रंग भरने के चित्र। दोनों का मुफ़्त नमूना पहले देख सकते हैं।
