गाँव समिति या मंडल का जमा-खर्च हिसाब कैसे रखें: आसान तरीका
By Akshay · 1 Nov 2026 · 6 min read
छोटा जवाब: गाँव समिति या मंडल का हिसाब साफ़ रखने के लिए पाँच नियम काफ़ी हैं। एंट्री सिर्फ़ एक व्यक्ति (आमतौर पर कोषाध्यक्ष) करे, हर जमा और ख़र्च उसी दिन तारीख़, रक़म, प्रकार और ब्योरे के साथ लिखा जाए, हर ख़र्च की रसीद रखी जाए, ग़लत एंट्री मिटाई न जाए बल्कि कारण लिखकर "रद्द" की जाए, और हर महीने कुल जमा, कुल ख़र्च और बचत सब सदस्यों को बताई जाए।
नीचे पूरा तरीका है: हर एंट्री में क्या लिखें, जमा-ख़र्च के प्रकार, रसीद, नक़द और बैंक का मिलान, महीने और साल की रिपोर्ट, और एक छोटी जाँच-सूची।
हिसाब साफ़ क्यों होना चाहिए?
गाँव की वर्गणी, त्योहार का चंदा, मंदिर का बिजली बिल, मरम्मत का ख़र्च: यह सब पैसा सबका होता है। ज़्यादातर गाँवों और मंडलों में हिसाब एक कॉपी में या WhatsApp पर रहता है। कोषाध्यक्ष बदल गया, कॉपी खो गई या कोई एंट्री छूट गई, तो ग़लतफ़हमी शुरू हो जाती है।
साफ़ हिसाब से:
- सदस्यों का समिति पर भरोसा बना रहता है
- अगले साल चंदा और वर्गणी इकट्ठा करना आसान होता है
- कोषाध्यक्ष बदलने पर भी हिसाब बिना रुकावट आगे चलता है
- ग़लती हो तो तुरंत पकड़ में आती है और सुधर जाती है
1. एक व्यक्ति, एक हिसाब
समिति की बैठक में तय करें कि एंट्री कौन करेगा। आमतौर पर यह कोषाध्यक्ष का काम होता है। बाक़ी सब हिसाब देख सकें, पर एंट्री एक ही व्यक्ति करे। इससे एक ही एंट्री दो बार नहीं होती और ज़िम्मेदारी साफ़ रहती है।
2. हर एंट्री में क्या लिखें
हर जमा या ख़र्च के लिए ये पाँच बातें लिखें:
- तारीख़: जिस दिन पैसा आया या गया
- रक़म: अंकों में
- प्रकार: चंदा, वर्गणी, त्योहार ख़र्च, मरम्मत, बिजली बिल वग़ैरह
- ब्योरा: किसने दिया या किसे दिया और किसलिए, जैसे "होली पंडाल का किराया"
- रसीद: हो तो उसका नंबर या फ़ोटो
3. जमा और ख़र्च के प्रकार पहले से तय करें
साल की शुरुआत में ही प्रकार तय कर लें, तो साल के आख़िर में हिसाब तुरंत समझ आता है। उदाहरण:
- जमा: सदस्य वर्गणी, चंदा/दान, बैंक ब्याज, हॉल या सामान का किराया, अन्य जमा
- ख़र्च: त्योहार ख़र्च, मरम्मत और निर्माण, बिजली-पानी बिल, सफ़ाई, अन्य ख़र्च
बहुत ज़्यादा प्रकार न बनाएँ। पाँच-छह जमा और पाँच-छह ख़र्च के प्रकार काफ़ी होते हैं।
4. रसीद और सबूत संभालकर रखें
हर ख़र्च का बिल या रसीद लें। रसीद न मिले, तो जिसे पैसे दिए उसका नाम और मोबाइल नंबर लिख लें। रसीद की फ़ोटो खींचकर रख लें, ताकि काग़ज़ खो जाए तब भी सबूत रहे।
चंदा लेते समय देने वाले को रसीद दें। इससे दान देने वाले का भरोसा बढ़ता है।
5. ग़लती हो तो मिटाएँ नहीं, "रद्द" करें
ग़लत एंट्री हो जाए तो उसे काटें या मिटाएँ नहीं। उस एंट्री के आगे "रद्द" लिखें, कारण लिखें और सही एंट्री नए सिरे से करें।
कटी-पिटी एंट्री शक पैदा करती है। कारण लिखकर रद्द की गई एंट्री भरोसा बढ़ाती है।
6. नक़द और बैंक का हिसाब अलग देखें
- जहाँ तक हो सके, लेन-देन बैंक खाते या UPI से करें
- नक़द पैसा आए तो जल्द से जल्द बैंक में जमा करें
- हर महीने बैंक पासबुक या स्टेटमेंट की बचत और कॉपी की बचत मिलाकर देखें
7. हर महीने हिसाब सबके सामने रखें
महीने के आख़िर में कुल जमा, कुल ख़र्च और बचत सब सदस्यों को बताएँ। बैठक में पढ़कर सुनाएँ या गाँव के ग्रुप पर भेजें। सवाल पूछने की पूरी छूट दें।
8. साल की रिपोर्ट बनाएँ
वित्त वर्ष आमतौर पर अप्रैल से मार्च माना जाता है। साल के आख़िर में यह रिपोर्ट बनाएँ:
- शुरुआती बचत: साल की शुरुआत में कितना पैसा था
- महीनेवार जमा और ख़र्च
- प्रकार के हिसाब से कुल जमा और ख़र्च
- आख़िरी बचत: साल के अंत में कितना पैसा बचा
यह रिपोर्ट सालाना सभा में रखें और उसकी एक कॉपी संभालकर रखें। अगर आपकी समिति या मंडल रजिस्टर्ड संस्था या ट्रस्ट है, तो ऑडिट और नियमों के बारे में किसी CA या ऑडिटर से सलाह लें।
हर महीने की छोटी जाँच-सूची
- सभी जमा और ख़र्च की एंट्री हो गई है?
- हर ख़र्च की रसीद या सबूत है?
- रद्द की गई एंट्री के आगे कारण लिखा है?
- बैंक की बचत और हिसाब की बचत मिलती है?
- महीने का हिसाब सदस्यों को बता दिया?
मुफ़्त हिसाब पन्ना (छापने के लिए)
इस तरीके को आज से शुरू करने के लिए हमारा मुफ़्त मासिक हिसाब पन्ना (PDF) डाउनलोड करें। इसमें तीन A4 पन्ने हैं: भरने का तरीका, महीने का हिसाब पन्ना (हर महीने नया छापें) और प्रति वाली चंदा रसीदें। मराठी में चाहिए तो हिशोब पान (मराठी PDF) देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गाँव या मंडल का हिसाब किसे रखना चाहिए?
आमतौर पर समिति का कोषाध्यक्ष। ज़रूरी यह है कि एंट्री एक ही व्यक्ति करे और बाक़ी सब सदस्य हिसाब देख सकें। कोषाध्यक्ष बदले तो पूरा हिसाब और रसीदें बैठक में सौंपी जाएँ।
हिसाब कॉपी में रखें या मोबाइल पर?
दोनों चलते हैं, नियम वही रहते हैं। कॉपी खो सकती है और हर किसी तक नहीं पहुँचती। मोबाइल पर रखें तो रसीद की फ़ोटो साथ में रहती है और सदस्य कहीं से भी देख सकते हैं। जो भी चुनें, हर एंट्री उसी दिन करें।
चंदे की रसीद देना ज़रूरी है?
हाँ, देनी चाहिए। रसीद से देने वाले को भरोसा रहता है कि उसका पैसा हिसाब में आया है, और समिति के पास भी सबूत रहता है। रसीद पर तारीख़, नाम, रक़म और किसलिए, ये चार बातें लिखें।
ग़लत एंट्री हो जाए तो क्या करें?
उसे काटें या मिटाएँ नहीं। एंट्री के आगे "रद्द" लिखें, कारण लिखें, और सही एंट्री नए सिरे से करें। इससे साफ़ दिखता है कि क्या बदला और क्यों।
साल के आख़िर में हिसाब कैसे बताएँ?
शुरुआती बचत, महीनेवार जमा-ख़र्च, प्रकार के हिसाब से कुल जोड़ और आख़िरी बचत की एक रिपोर्ट बनाकर सालाना सभा में रखें। सवालों के जवाब के लिए रसीदें साथ रखें।
हिसाब मोबाइल पर, सबके सामने
अगर आप कॉपी और WhatsApp की जगह हिसाब एक जगह रखना चाहते हैं जिसे सब सदस्य देख सकें, तो हमारा गाँव ख़र्च (Gaon Kharcha) वेब ऐप देखें। इसमें सिर्फ़ हिसाब रखने वाला व्यक्ति एंट्री करता है, बाक़ी सब सदस्य बिना लॉगिन लिंक खोलकर फ़ोन पर हिसाब देख सकते हैं। रद्द की गई एंट्री कारण के साथ दिखती रहती हैं, हर एंट्री के साथ रसीद की फ़ोटो रख सकते हैं, और साल की रिपोर्ट PDF में मिलती है।
अभी यह ऐप मराठी और अंग्रेज़ी में चलता है। आपके गाँव या मंडल के लिए हिंदी में चाहिए, तो संपर्क पेज से हमें ईमेल करके बताएँ।
तरीका कोई भी हो, नियम एक ही है: हर रुपये की एंट्री, हर ख़र्च का सबूत, और सबके लिए खुला हिसाब।
यह भी पढ़ें (मराठी में): वाडी किंवा मंडळाचा जमा-खर्च हिशोब कसा ठेवावा
